Posts

अविस्मरणीय प्रसंग

       हम सब के दिलो - दिमाग़ में कुछ घटनाएँ या बातें ऐसी हावी होती हैं कि कितना भी भूलना चाहें नहीं भूल पाते । वो घटनाएँ सुखद या दुखद कैसी भी हो सकती हैं । कुछ दिनों पहले तक मैं यह सोचती थी कि मेरे ऊपर बचपन की बातें ज़्यादा हावी हैं लेकिन अभी हाल ही मेरा यह भ्रम टूट गया।          मैं अपने को सौभाग्यशाली मानती हूँ कि मुझे ऐसे लोगों का सानिध्य प्राप्त हुआ कि उनसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिलता रहता है ।इनमें से कुछ ऐसे हैं जिनसे मैं फ़ेसबुक के माध्यम से मिली । तो ऐसे ही फ़ेसबुक के माध्यम से दो - तीन महीने पहले मधु दीदी से परिचय हुआ । मालूम चला वो इलाहाबाद में ही पढ़ी है और अभी राँची में रह रहीं साथ ही ऑल इंडिया रेडियो में उद्घोषिका हैं ।पहले तो वो मुझसे “आप” कहकर बात करतीं थीं फिर बातचीत के दौरान उन्हें ज्ञात हुआ कि मैं उनसे छोटी हूँ ,जैसे ही उन्हें यह मालूम हुआ तुरंत उनके मुँह से निकला,”अरे ! तुम तो हमसे बहुत छोटी हो ।” उस दिन से हम दोनों में बहन का रिश्ता क़ायम हो गया। अब नित्य बात करना हमारी जीवनचर्या में शामिल हो गया था ।मज़ेदार बात यह थी कि...

अनमोल पूँजी

 वृद्धों का अपमान ना करना वे हैं धुरी समाज की बरगद सी छाया  उनसे ही मिलती उस छाँव में होती शीतलता महत्ता, उसकी कम ना करना । रखते पास , कोषागार अनुभव का उपभोग कोष का तुम करना अपव्यय कर अपमान ना करना  उसका मान बनाए रखना । संकट में बन आशीष का साया  बनते संकट हर्ता  उस साए से दूर ना रहना साए का मान बनाए रखना । पुरातन संस्कृति सभ्यता के ज्ञाता वो सहेज उस ज्ञान को पुरातन संस्कृति, का मान तुम रखना उनकी ही छत्र - छाया में नन्हें - मुन्नों को प्यार है मिलता उस प्यार का मान तुम रखना छाया का सम्मान तुम करना। कुछ पल बैठ क़रीब एकाकी ना रहने देना कुटुंब की नींव कहाते नींव को निर्बल ना करना थाम हमारे हाथों को पथ पर चलना हमें सिखाया उन झुर्री वाले हाथों का परित्याग ना करना हाथों को उनके थामे रखना  देख मलिन मुख उनका निराश ना होना उस मुख के पीछे के संघर्ष को पढ़ना संघर्ष का मान बनाए रखना । वृद्धों का अपमान ना करना —————x—————

नन्हीं चिड़िया

लगता, फिर आई वह नन्हीं चिड़िया चीं चीं चीं कर शोर मचाती; मैं झल्लाई, दाना - पानी सब तो रखा था फिर क्यों चीं चीं कर बुला रही ? जाकर देखा तो चिड़िया नहीं, (बल्कि, )चिड़ियों का पूरा कुनबा,था जिनके लिए वह ( दाना पानी)कम था। और दिया जब दाना-पानी, चुगने लगीं सब चिड़िया रानी। अब तो नित्य नियत समय पर आना उनका तय था मन मेरा भी भाव-विभोर था । आज बुलाने सब शयन कक्ष तक आईं थीं जो भूल गई थी उनका खाना रखना । दौड़ी जब वह सब रखने   तब गए पैर लड़खड़ा मेरे। ओह ! तो यह था केवल सुन्दर सपना ! अब तो कहीं नहीं वे नन्हीं चिड़ियाँ, ना ही उनकी चीं चीं चीं। उदास असहाय सी बैठी मैं खोज रहीं थीं आँखें मेरी चिड़ियों के उस कुनबे को । तभी दूर गगन से  आई आवाज़ - तुम सब हो अपराधी मेरे तुम सबने उजाड़े घरौंदे मेरे मिटाया अस्तित्व को मेरे फिर खोज रहीं क्यों मुझे ये आँखें ? सुनकर यह एक टीस उठी; रुंधे स्वरों में मैं बोली- तुम बिन यह आकाश सूना,  धरती भी सूनी, और यह भी सच,  हैं  हम सब अपराधी।   पर अब ना घरौदें उजड़ने दूँगी, वृक्ष लगा कर फिर बसवा दूंगी,  लाकर तुमको अपनी दुनिया में, अपराध बोध मि...

रिश्ता पिता - पुत्री का

             आज आद्या ने अपने पापा के साथ एक ऐसी शरारत की कि मुझे अपने द्वारा की गई शरारत याद आ गई। कहा जाता है बेटियों को पापा और बेटों को माँ ज़्यादा मानती है ।लेकिन ऐसा नहीं होता माँ - बाप के लिए बच्चे बराबर होते हैं । ऐसा लोग कहते हैं, मेरे पास हर बात का अपवाद होता है इसका भी है लेकिन आज गंभीर मुद्दे पर नहीं लिखना ।             बेटियों में आकर्षण शक्ति होती है वो जल्दी ही लोगों को अपनी ओर आकृष्ट कर लेती हैं। आपको प्रायः सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो या लेख मिल जाएगा जिसमें पिता और पुत्री का विशेष प्रेम देखने को मिलता है। ऐसा नहीं है कि पुत्र को वैसा प्रेम नहीं होता अपने पिता से, या वो वैसी हरकत नहीं करता। पुत्र भी वैसी ही हरकत करता है बस वो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं होता । शायद इसलिए कि पूर्व में हम बेटा - बेटी में भेदभाव करते थे और उस पूर्वाग्रह को मिटाने के लिए पिता - पुत्री का प्रेम ज़्यादा वायरल होता है ।            हमारे यहाँ आद्या भी अपने पिताजी के काफ़ी क़रीब हैं । हाँलाकि उसको जो का...

मदर्स डे

      मई माह का दूसरा रविवार “मदर्स डे”। माँ को समर्पित एक दिन।एक दिन ? आजकल प्रेम,माँ-बाप,बेटा-बेटी सबके लिए एक दिन बना दिया गया है। क्यों और किसलिए इन सब पचड़ों में मैं नहीं पड़ना चाहती। आज माँ पर ही लिखना चाहती हूँ।मैंने लोगों को माँ के जाने के बाद माँ पर कविता, फ़ोटो या दान करते देखा है चाहे माँ के जीवित रहते उनको उपेक्षित ही क्यों ना किए हों।                   माँ या किसी भी रिश्ते के लिए एक दिन नहीं हो सकता फिर भी जब मदर्स डे पर बच्चे (कुची,आद्या और प्रणव)केक कटवाते थे तब मुझे और जानकी को बहुत अच्छा लगता था।लेकिन आजतक मैंने अपनी मम्मी को कभी केक नहीं भेजा। हाँ,सुबह फ़ोन कर देती हूँ ।सामान्यतः वही फ़ोन करती हैं मैं नहीं और हम दोनों में औपचारिक बातचीत ही होती है।हम माँ-बेटी में दोस्ती वाला रिश्ता पनपा ही नहीं।मैं तो मदर्स डे पर भी फ़ोन नहीं करती थी, कुछ सालों पहले सुबह-सुबह मम्मी का फ़ोन आया कि “डॉली तुमने हमें विश नहीं किया”? मैंने पूछा “आज है क्या” बोलीं टुक्कू(मेरे छोटे भतीजे) बोल रहा था, “आज तुम्हारी बेटी ने तुम्हें विश...

अवध मा बाजै बधइया

आज अवध मा बाजै बधइया,बाजै बधइया नगरी सज गई जैसे दुल्हनिया नर- नारी मिल गावैं सोहरिया आज अवध मा ——- कोसिला कहाएँ राम की मइया मँझली रानी भरत की मइया लखन- शत्रुघ्न की सुमित्रा मइया आज अवध मा बाजै बधइया विष्णु लिए हैं राम शरीरिया शेषनाग लिए लखन शरिरिया चारों ललन जन्में चैत नवमिया आज अवध—- नील वर्ण के बड़के भइया श्वेत हैं तीनों लघुरे भइया चारों पर दशरथ लुटावैं मोहरिया आज अवध मा बाजै——

देव दीपावली

 सजा दो आज काशी को कि सारे देव आए हैं देव आए हैं जलाने दीप आएँ हैं। चिर निद्रा पूर्ण कर देव सारे आज जागे हैं निद्रा पूर्ण कर स्नान करने देव आएँ हैं  देव आए हैं जलाने दीप आएँ हैं  सजा दो आज काशी को कि सारे देव आएँ हैं। त्रिपुरासुर का वध कर शिव त्रिपुरारी कहाए हैं तभी तो देव मिल सारे  जलाने दीप आएँ हैं सजा दो आज काशी को कि सारे देव आएँ हैं बिछा दो फूल राहों में चुभे ना पाँव में काँटे झुका दो शीश चरणों में कि सारे देव आए हैं देव आएँ हैं जलाने दीप आएँ हैं सजा दो आज काशी को कि सारे देव आएँ हैं देव आए हैं जलाने दीप आएँ हैं