बीते पल
याद आते हो तुम और, वो पल , जिनमें करते थे हम बेहिसाब बेमतलब की बातें । लड़ते थे झगड़ते थे फिर भी करते थे बातें बेहिसाब , बिन मिले इतनी बातें करते थे कैसे हम जनाब ? फिर, ना जाने क्यों बंद हो गईं बातें खैर,कोई गिला नहीं ना है कोई शिकायत , उन पलों को याद कर जी लेती हूॅं आज को क्या तुम्हें भी याद आते हैं वो बीते पल ? मुझे तो याद आते हो तुम, बस तुम ....।।