मॉं भी इंसान है
माँ को देते भगवान का दर्जा , लेकिन मॉं भी आखिर है एक इंसान । दोषरहित वह भी नहीं कभी अनजाने , कभी नादानी में हो जाती उससे भी भूल । फिर भी बच्चों के हित का ही मन में रखती भाव । और ऐसी कोई मॉं नहीं जिससे कभी ना हुई हो कोई भूल । बेटा हो या बेटी , आज की मॉं करती दोनों से प्रेम । रिश्ता मॉं का बच्चों से ऐसा टूट ना पाता , लगने से ठेस । बच्चों के संकट को सोच , रहती वह प्रतिपल आकुल । मॉं को जैसे होता भान , वैसे बच्चों को होता , मॉं के दुःख का भान । बेटा-बेटी में अंतर इतना— बेटी को कभी माँ थी सिखाती, अब माँ को बेटी है सिखाती, दुनियादारी की समझ भी बताती। लेकिन माँ ने देखी है दुनिया ज्यादा, इंसानों की परख भी है ज्यादा फिर भी अनजाने में होती त्रुटि , क्योंकि वह भी है एक इंसान ।।