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जाना अधिकार है , बुलाया जाना सुख

          आज का यह लेख महिलाओं के मन में उमड़ते एक सवाल के विषय में । वो भी उन महिला विशेष वर्ग के विषय में जो मेरी हमउम्र हैं , या मुझसे कुछ साल बड़ी या कुछ साल छोटी ।              मुझे लोकगीत सुनना पसंद है और गाना गाना भी सीखती हूॅं तो इसी क्रम में एक दिन मैंने बंदिनी फिल्म के "अब के बरस भेज भैया को बाबुल " सीखने की इच्छा जाहिर की । उस वक्त मैंने इस गीत की गहराई को समझा । उसी दौरान लोकगायिका उर्मिला श्रीवास्तव जी का "नइहरे से भईया नाही अइले हो रामा, बितले फगुनवा " सुना । तभी से उधेड़बुन में हूॅं ।               क्या हम महिलाओं को मायके से बुलावे के बाद ही मायके जाना चाहिए ? हम महिलाओं का मायके से लगाव छूटना असंभव है । जिसने हमें जन्म दिया , पाला - पोसा उससे भावनात्मक जुड़ाव जीवन भर बना रहता है । विज्ञान भी यही कहता है - माॅं की कुछ कोशिकाएं बच्चे के शरीर में कई वर्षों यहाॅं तक की जीवन भर रह सकती हैं । इसी कारण मायके और वहाॅं के रिश्तों से भावनात्मक अलगाव भी आसान नहीं होता ।     ...

मन की गाॅंठें

हो जाती हैं अब  बातें बंद , छोटी - छोटी बातों पर यूॅं ही होती बातें बंद । कभी जो थे डपटते , पूछते थे हाल , समझाते थे जीवन के पाठ , छेड़ने पर ठहाका मार हॅंसते थे । तुम सही , हम सही की जंग में कर देते हैं बातें बंद । अहं के टकराव से  रिश्तों का ऑंगन सूना लगता है । जीवन क्षणभंगुर है ,  ज्ञान सभी को है इसका । फिर छोटी-छोटी बातों पर क्यों करते बातें बंद ? सुलझा लो मन की गॉंठें चुभते हैं चुप्पी के तीर । चुप्पी से तुम भी घायल , मैं भी घायल । समाधान जब एक है , तो छोड़ अहं को , फिर से कर लो बातें । रिश्तों के ऑंगन में होगी हरियाली  जब तोड़ोगे तुम चुप्पी की जाली ।।

बोर्ड रिजल्ट और समाज की सोच

           सारे बोर्ड के रिजल्ट आ चुके हैं और इस समय मैं विचलित हूॅं । इसलिए नहीं कि मेरे किसी खास का नम्बर कम आया है बल्कि इसलिए कि क्या जिन बच्चों ने बोर्ड की परिक्षा दी है , उनसे उनका रिजल्ट पूछना चाहिए या नहीं ।              मेरे बच्चों का कहना है कि ," तुम क्यों रिजल्ट पूछती हो, लोग खुद ही बता देंगे ।"  वैसे मैं केवल अपने खास का ही बोर्ड रिजल्ट पूछती हूॅं , किसी भी कॉम्पटीशन का नहीं ।            मेरा बेटे ने जब दसवीं की परीक्षा दी थी‌ तब वो घर का पहला बच्चा था तो उस समय मैंने खुद सबको फोन से सूचित किया था , जिनको सूचित नहीं कर पाई उन्होंने फोन कर पूछा और मैंने सबको बताया भी । ज्यादातर लोगों को केवल पर्सेंट से मतलब था केवल भइया ने ही हर विषय का नंबर पूछा था । वो ना केवल हर विषय का नंबर पूछता है वरन् भतीजों का नंबर अलग-अलग बताता भी है ।              बच्चों का बोर्ड का रिजल्ट क्यों नहीं पूछना चाहिए , मुझे समझ नहीं आता । मुझे लगता है कि बच्चों से ज्यादा...

बीते पल

याद आते हो तुम और, वो पल , जिनमें करते थे हम बेहिसाब बेमतलब की बातें । लड़ते थे झगड़ते थे फिर भी करते थे बातें बेहिसाब , बिन मिले इतनी बातें करते थे कैसे हम जनाब ? फिर, ना जाने क्यों  बंद हो गईं बातें  खैर,कोई गिला नहीं ना है कोई शिकायत , उन पलों को याद कर  जी लेती हूॅं आज को क्या तुम्हें भी याद आते हैं  वो बीते पल ? मुझे तो याद आते हो तुम,  बस तुम ....।।

महिमा माॅं बगलामुखी की

 बगलामुखी माॅं की महिमा अपार  सुन लो कथा उनकी बारम्बार  धरती पर जब संकट छाया श्री हरि ने माॅं का ध्यान लगाया  तब ही माॅं ने लिया अवतार  सुन लो कथा उनकी बारम्बार  बगलामुखी माॅं की महिमा अपार  सुन लो कथा उनकी बारम्बार  पीत वर्ण में अद्भुत लगतीं  जिह्वा शत्रु की कर में रखतीं  संकट हरतीं हैं मॉं निर्विकार  सुन लो कथा उनकी बारम्बार  बगलामुखी माॅं की महिमा अपार  सुन लो कथा उनकी बारम्बार ।।

आ रहे हैं श्री राम

सज गया अयोध्या धाम  गा रहे सब मंगल गान  नगर में /अवध में आ रहे हैं श्री राम  चौदह वर्ष वन में बिताया रावण वध कर मान बढ़ाया  सिया लखन संग लौटे धाम अवध में आ रहे हैं श्री राम  सज गया अयोध्या धाम  गा रहे मंगल गान  नगर में/अवध में आ रहे हैं श्री राम  सुन खबरिया माॅं हर्षाईं / मुस्काईं आरती थाल सजा कर लाईं देख  भरत - शत्रुघ्न निहाल अवध आ रहे हैं श्री राम सज गया अयोध्या धाम  गा रहे सब मंगल गान  अवध में / नगर में आ रहे हैं श्री राम  कोयल कूके मोर इतराएं वन-उपवन पुष्प बरसाएं  नर - नारी सब करें प्रणाम  अवध में/ नगर में आ रहे हैं श्री राम ।। सज गया अयोध्या धाम  गा रहे सब मंगल गान  अवध में / नगर में आ रहे हैं श्री राम।।

दिव्य कुंभ

 ये दिव्य कुंभ है , भव्य कुंभ है , महाकुंभ है अपना इसमें स्नान - ध्यान का है हर प्राणी का सपना  दानव - दैत्य में हुआ रण लेने को अमृत कलसा उज्जैन , प्रयाग , नासिक ,हरिद्वार में तब अमृत कण बरसा  है संगम रेती , प्रयाग धाम में कल्पवास का सपना  ये दिव्य कुंभ है , भव्य कुंभ है , महाकुंभ है अपना इसमें स्नान - ध्यान का है हर प्राणी का सपना  संतों की भी भव्य कुंभ में होती स्नान की इच्छा  स्नान राजसी के हों साक्षी माॅंगे पुण्य की भिक्षा करें दान सत्संग करें सब देखें मोक्ष का सपना ये दिव्य कुंभ है , भव्य कुंभ है , महाकुंभ है अपना इ समें स्नान - ध्यान का है हर प्राणी का सपना ।।