महिषासुर वध मॉं ने किया
शंख बज रहे, उलूध्वनि ( मंगलध्वनि) हो रही कि महिषासुर वध मॉं ने किया माता ने भक्तों का भव से बेड़ा पार किया न त्रिलोक में दैत्य ने त्रास मचाया देवों ने मिल मॉं का ध्यान लगाया तब सिंह सवार मॉं ने दरस दिखाया माता ने भक्तों का जीवन तार दिया शंख बज रहे, उलूध्वनि हो रही कि महिषासुर वध मॉं ने किया माता ने भक्तों का भव से बेड़ा पार किया देवों ने मिल मॉं को शस्त्र दिए रूप देख मॉं का सब दैत्य डरे नौ दिन मॉं , और दानव में , युद्ध चला दसवें दिन में मॉं ने सबका संहार किया शंख बज रहे उलूध्वनि हो रही कि महिषासुर वध मॉं ने किया माता ने भक्तों का भव से बेड़ा पार किया