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दहशत

 अभी तो वापिस लौटी थी ज़िंदगी  कि फिर दहशत के दिन आ गए । नहीं जीना दहशत के साए में  नहीं खोना किसी अपने या पराए को नहीं सुनना एम्बुलेंस की साँय - साँय नहीं जीना दहशत के साए में  अभी तो वापिस लौटी थी ज़िंदगी । कितने अनाथ हुए कितनों की गोद सुनी हुई रोग ग्रस्त की मदद ना कर पाने का बोझ उतरा ना था कि फिर दहशत के दिन आ गए नहीं जीना दहशत के साए में । फ़ोन की घंटी से अनहोनी की आशंका किसी का व्हाट्सअप पर सक्रिय ना होना किसी का फ़ेसबुक से अदृश्य होना सब दहशत में लाएगा  नहीं जीना दहशत के साए में । सुख के बाद दुख दुख के बाद सुख का भान है किन्तु हर - पल दहशत से अवगत नहीं होना अभी तो लौटी थी ज़िंदगी कि फिर दहशत के दिन आ गए नहीं जीना दहशत के साए में ।

आरती

    सुबह पूजा ख़त्म करने के बाद मैं  हनुमान जी की बड़ी सी फ़ोटो के आगे आरती गा रही थी, “आरती की जै हनुमान लला कि………….” कि अचानक कुछ ऐसा याद आया और आरती के दौरान ही हँसी आ गई।भगवान भी सोच रहे होंगे कि कैसी पुजारिन है कि पूजा भी बिना हँसे नहीं कर पा रही।क्या करूँ जानकी,हमजोली (मिस्टर आनंद सिंह बिष्ट ) के साथ बिताए पल ऐसे ही हैं।शारीरिक रूप से हम दूर हैं लेकिन हमारी यादें ऐसी हैं कि अकेले में भी हम तीनों ठहाके लगा लेंगे।मेरे एक मित्र के अनुसार “जो बीत गया उसको वहीं छोड़ देना चाहिए।” मैं इससे सहमत नहीं हूँ , जिन बीते पलों को याद करने से चेहरे पर मुस्कान आए या हँसी आए उनको हमेशा याद करना चाहिए।        अब पूजा के दौरान हँसी आई है तो घटना भी पूजा से ही संबंधित है। हुआ यूँ था कि मेरे घर से एक घर छोड़कर एक आंटी रहती थीं।उनके दो बेटे हैं ,बड़ा बेटा मेरी उम्र का है। उन दिनों वो प्रतियोगी परीक्षाएँ दे रहा था लेकिन सफलता हाथ नहीं लग रही थी।स्वाभाविक है आंटी-अंकल भी उसके चयन ना होने से परेशान हो रहे थे।आंटी ज़्यादा ही परेशान थीं क्योंकि बिना जीविका वो विवाह करने को ...

स्मरणीय पल

लगता है , आज तुमने मेरी सुध ली है तभी तो मैं आकुल हूँ । हम - दोनों में कुछ तो विशेष है तभी तो मेरी सुध लेने पर मैं  और तुम्हारी सुध लेने पर तुम  दोनों आकुल होते हैं । तुमसे क्या  उलाहना दूँ तुम तो नादान थे बिछोह के भान से अंजान थे । मुझे तो ज्ञात था  बिछोह का भान था फिर भी दिल दे बैठी । मिलन - बिछोह है  प्रकृति का नियम मेरा स्थान कोई और  और तुम्हारा स्थान कोई और लेगा फिर भी तुम सबका टंटा  प्रेमालाप सब स्मरण रहेगा लगता है, आज तुमने मेरी सुध ली है तभी तो मैं आकुल हूँ ।   

प्रेम के बदलते रंग

      प्रेम, कब -कहाँ और किससे हो जाएगा कहा नहीं जा सकता । अब देखिए ना मुझे इस उम्र में हो गया । अब क्या करूँ, हो गया तो छिपाना क्यों ? अब तक तो लगता था कि प्रेम करने की उम्र 16 से 25 -26 साल तक की होती है ।सच्चाई तो यह है कि प्रेम करने की कोई उम्र नहीं होती और प्रेम किया नहीं जाता हो जाता है ।      बहुत लोग सोच रहे होंगे शादी के इतने साल बाद किसी अन्य से प्रेम ? कहीं दिमाग़ तो नहीं ख़राब हो गया मेरा 😀।लेकिन प्रेम पर किसी का ज़ोर नहीं । मुझे तो लगता है कि इस समय का प्रेम ज़्यादा परिपक्व, सच्चा और वासना रहित होता है । समझ नहीं आता कि प्रेम करना ग़लत है या नफ़रत ? अगर प्रेम करना ग़लत नहीं तो छिपाना क्यों ?      मैंने आज तक प्रेम को छिपाना ही सीखा है फिर चाहे वो कोई हो। मैं ,मम्मी और भइया ना तो खुलकर प्यार दिखा पाते हैं और ना ही दुख। लेकिन अब लगता है कि अगर आप प्रेम करते हैं तो उसे ज़ाहिर कर ही देना चाहिए । अबोध बच्चे को जब आप अपने सीने से लगाते हैं तो वह आपकी दिल की धड़कन और स्पर्श से जान जाता है कि आप उससे कितना प्रेम करते हैं ।लेकिन जब हम यु...

बिछोह

 मुझे तड़पाना छोड़ दो यूँ सपनों में आना छोड़ दो ज्ञात होता नियति में है बिछड़ना तो क्यों ही करती प्रीति अंतिम क्षण तक चाहा था  संग तुम्हारा पर हाय रे ! नियति उसको यह मंज़ूर ना था बिछोह का कष्ट तुम क्या जानो स्वभाव से हो तुम छलिया मैं नहीं कोई और सही तुम्हारी प्रवृत्ति यही है  चलो यह भी सच स्वीकार किया गिला क्या ही करूँ जब नियति में ही था बिछड़ना बस विनती इतनी है सपनों में आना छोड़ दो मुझे यूँ तड़पाना छोड़ दो ।

कभी तो नज़र मिलाओ

       प्रकृति के कण- कण में संगीत है।वायु के चलने पर पेड़ों के पत्तों का संगीत,  चिड़ियों के चहचहाने में संगीत ,नदी के बहने में संगीत, झरने - समुद्र सब में संगीत। हर जगह संगीत विद्यमान है शायद इसीलिए ईश्वर ने सबको संगीत प्रेमी बनाया है। हाँ, कैसा संगीत पसंद है वो अलग हो सकता है।मुझे तो लोकगीत, फ़िल्में गाने और शास्त्रीय सभी पसंद है (शास्त्रीय गानों से लगाव मेरे भतीजों के गायन क्षेत्र में आने के बाद हुआ)। पसंदीदा गाने सुनते वक्त मुझे और मेरे पतिदेव को उससे जुड़ी कोई घटना या इंसान (अगर है तो) याद ज़रूर आता है।    अदनान सामी का “ कभी तो नज़र मिलाओ” जब भी सुनती हूँ तो एक शर्म मिश्रित मुस्कान आ ही जाती है। आज भी ऐसा ही हुआ। आख़िर इस गाने से मीठी यादें जो जुड़ी हुई है।     जून 2000 में अदनान सामी का “ कभी तो नज़र मिलाओ”  एल्बम आया था काफ़ी लोकप्रिय हुआ था।दावे से कह सकती हूँ हर संगीत प्रेमी के घर यह कैसेट रहा होगा।  मुझे धुँधला सा याद है टीवी पर गानों की रेटिंग से संबंधित कार्यक्रम आता था जिसमें यह पहले पायदान पर रहता था।भइया भी गानों का...

नि:शब्द संघर्ष

कितनी पीड़ा में रही होगी  जब तुमने ये कदम उठाया होगा काश तुमने एक बार साझा की होती अपनी मानसिक वेदना को। कितनी पीड़ा में रही होगी जब तुमने ये कदम उठाया होगा जिंन्दगी एक रंगमंच है  बखूबी निभाया अपना किरदार  कि हम सब भी ना समझ सके तुम्हारी मानसिक वेदना को। कितनी पीड़ा में रही होगी जब तुमने ये कदम उठाया होगा। शायद तुम्हें भी सिखाया गया होगा जहाँ डोली जाए वहीं से अर्थी उठने की रीति वह रीति तुम निभा गई कितनी पीड़ा में रही होगी  जब तुमने ये कदम उठाया होगा। काश यह रीति ना निभाती हम दोस्तों को पीड़ा बताती कुछ तो समझते कुछ तो करते यूँ ना तुमको हारने देते । कितनी पीड़ा में रही होगी  जब तुमने ये कदम उठाया होगा।