मन की गाॅंठें
हो जाती हैं अब
बातें बंद ,
छोटी - छोटी बातों पर
यूॅं ही होती बातें बंद ।
कभी जो थे डपटते ,
पूछते थे हाल ,
समझाते थे जीवन के पाठ ,
छेड़ने पर ठहाका मार हॅंसते थे ।
तुम सही , हम सही की
जंग में कर देते हैं बातें बंद ।
अहं के टकराव से
रिश्तों का ऑंगन सूना लगता है ।
जीवन क्षणभंगुर है ,
ज्ञान सभी को है इसका ।
फिर छोटी-छोटी बातों पर
क्यों करते बातें बंद ?
सुलझा लो मन की गॉंठें
चुभते हैं चुप्पी के तीर ।
चुप्पी से तुम भी घायल ,
मैं भी घायल ।
समाधान जब एक है ,
तो छोड़ अहं को ,
फिर से कर लो बातें ।
रिश्तों के ऑंगन में होगी हरियाली
जब तोड़ोगे तुम चुप्पी की जाली ।।
मार्मिक।
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteV nice poetry
ReplyDeleteAdbhut lekhan👏👏
ReplyDeleteRight bahut sahi baat
ReplyDeleteबहुत सुन्दर
ReplyDeleteBahut sundar rachna.kisi vibhed par man ko manane ka achchha upay bataya hai, jis se ki bahaar laut aaye. Yatharth parak rachna aur vichar diya hai aapne.
ReplyDeleteआज के संदर्भ को यथार्थ करती है ये लैखनी
ReplyDeleteअद्भुत